Wednesday, December 5, 2018

चुनाव के पहले क्यों हो रही है उल्लुओं की तस्करी

भारत में चुनाव के दौरान अधिकारी आम तौर पर ऐसे 'बेशकीमती सामान' की तस्करी रोकने में व्यस्त रहते हैं जिन्हें वोटरों को प्रलोभन देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

लेकिन कर्नाटक के अधिकारी इन दिनों पड़ोसी राज्य तेलंगाना में की जा रही उल्लुओं की तस्करी रोकने में जुटे हैं. तेलंगाना में शुक्रवार को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है.

कर्नाटक पुलिस और वन अधिकारियों को कम से कम छह लोगों ने जानकारी दी है कि भारतीय उल्लू की एक प्रजाति की तेलंगाना में 'बहुत मांग' है. उल्लुओं की मांग इनकी 'खूबियों' के लिए नहीं बल्कि इस वजह से है कि 'उल्लू के शरीर के हिस्से विरोधी उम्मीदवार के लिए दुर्भाग्य की वजह बन सकते हैं.'

कर्नाटक के कलबुर्गी ज़िले के सेडम की पुलिस ने बीबीसी को बताया, "उन छह लोगों में से दो ने लोगों ने बागलकोट ज़िले के जामखंडी में दो पक्षियों को इस दौरान बेचने के लिए ही पाला है. "

चुनाव में काला जादू?
इन सभी को सेडम से गिरफ़्तार किया गया. ये इलाका तेलंगाना की सीमा से लगा हुआ है. तेलंगाना में शुक्रवार 7 दिसंबर को 119 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान होना है.

कलबुर्गी में वन विभाग के सहायक वन संरक्षक रामकृष्ण यादव ने बताया, "उनका कहना है कि तेलंगाना से एक व्यक्ति ने उनसे फ़ोन पर संपर्क किया था. उसने इन लोगों को बताया था कि विरोधी उम्मीदवार पर काला जादू करने के लिए उल्लू की ज़रूरत है."

एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "उनके संपर्कों के ज़रिए राजनेता तक पहुंचना मुश्किल काम होगा क्योंकि हम नहीं जानते कि क्या वो नेता ही ऐसा करना चाहते थे या फिर उनके कैंप के किसी और व्यक्ति की ऐसी चाहत थी."

दिवाली पर क्यों दी जाती है उल्लुओं की बलि?

कहाँ और क्यों चोरी हो रहे हैं उल्लू और बाज़

ये अधिकारी मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं है. ऐसे में उन्होंने अपना नाम नहीं ज़ाहिर करने की गुज़ारिश की.

यादव ने बताया, "विरोधी खे़मे में डर फैलाने के लिए भी उल्लूओं का इस्तेमाल होता है. इससे ये माना जाता है कि विरोधी खेमे में कोई उनके ख़िलाफ काला जादू कर रहा है. ये कोशिश विरोधी के हौसले तोड़ने के लिए की जाती है."

उल्लुओं की अवैध तस्करी
भारत में उल्लुओं की कुल तीस प्रजाति पाई जाती हैं. इनमें से दो प्रजातियां- ईगल आउल और बार्न आउल- की अंधविश्वास और काला जादू के लिए अवैध बाज़ार में ख़ासी मांग है.

इस चलन से विशेषज्ञ भी चिंतित हैं.

वनचरों के वैध और अवैध व्यापार पर नज़र रखने वाले संगठन ट्रैफ़िक इंडिया के आला अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि अवैध व्यापार किस सत्र पर हो रहा है, ये बताने के लिए कोई सही आंकड़े नहीं हैं.

भारतीय वन सेवा (आईएफ़एस) के अधिकारी और ट्रैफ़िक इंडिया के प्रमुख डा. साकेत बडोला ने बताया, "हमारी अनौपचारिक जानकारी के मुताबिक़ अवैध व्यापार तेज़ी से बढ़ रहा है. उत्तर भारत के राज्यों में ये काफी बड़े पैमाने पर हो रहा है. दक्षिण भारत में भी इसकी मौजूदगी है. तंत्र करने वाले उल्लुओं का इस्तेमाल करते हैं."

डा. बडोला ने बताया, "दिवाली के दौरान उल्लुओं की मांग बढ़ जाती है. उन्हें धन की देवी लक्ष्मी का वाहन माना जाता है. बीते महीने दीवाली के पहले हमने उल्लुओं के इस्तेमाल के ख़िलाफ चेतावनी जारी की थी."

चुनाव के पहले क्यों हो रही है उल्लुओं की तस्करी

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